Share kya hai | शेयर कितने प्रकार के होते हैं

Share kya hai ? यह कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(84) में और शेयर कितने प्रकार के होते हैं यह कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 43 में दिया गया है | इसके अनुसार शेयर को मुख्यतः दो भागों में बांटा गया है समता अंश और अधिमान अंश | दोस्तों अगर आप शेयर बाजार के बारे में सीखना चाहते है या शेयर बाज़ार में निवेश करना चाहते है तो आपको share क्या है ? और Type of share in Hindi को समझना बहुत ही आवश्यक है |

दोस्तों यहाँ तो हम Share kya hai और शेयर कितने प्रकार के होते हैं के बारे में विस्तार में बात कर ही रहे है इसके अलवा मैंने शेयर कैपिटल कितने प्रकार के होते है इसको भी बहुत ही विस्तार में समझाया है आप इस पोस्ट को भी जरुर पढ़े |

Share kya hai (शेयर क्या हैं )

Table of Contents

प्रत्येक कम्पनी को अपना बिज़नेस चलने के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है इस पूंजी को जुटाने के लिए कम्पनी अपनी पूरी पूंजी को छोटे छोटे टुकडो में बाट देती है जिसे शेयर या अंश कहा जाता है | शेयर कम्पनी के कुल अंश पूंजी का एक छोटा हिस्सा होता है और ये सभी छोटे छोटे हिस्से को सामूहिक रूप से शेयर कैपिटल कहा जाता है |

शेयर क्या होता हैं इसे हम एक उदहारण से समझते है –

एक कम्पनी जिसकी Authored शेयर कैपिटल 10 लाख है उसने अपने Authored शेयर कैपिटल को 1 लाख भागो में विभाजित कर देती है | इस प्यात्येक भाग की कीमत 10 रुपये है जिसे अंश पूंजी कहा जाता है |

दोस्तों आभी हमने share meaning in hindi के बारे में जाना | अब हम शेयर कितने प्रकार के होते है ( Types of share in Hindi ) इसे समझेंगे |

इसके अलवा अगर आप share market kya hai शेयर बाजार क्या होता है को समझना चाहते है तो लिंक पर क्लिक कर के मेरे उस पोस्ट को पढ़ सकते है | दोस्तों मै आप को विश्वास दिलाता हु की इस पोस्ट को पूरा पढने के बाद share market kya hai शेयर बाजार क्या होता है ये आप को पूरी तरह से समझ आ जायेगा |

Equity share क्या है – इक्विटी शेयर क्या है

जब हम शेयर की बात करते है तो हम मुख्या रूप से इक्विटी शेयर की बात करते है लेकिन ये इक्विटी शेयर क्या होता है Equity share kya hota hai | इक्विटी शेयर होल्डर (Equity shareholder)  वे शेयर होल्डर हैं जो प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट से शेयर हासिल करते है उसे इक्विटी शेयर होल्डर  कहा जाता है | इस प्रकार के शेयर होल्डर कंपनी के वास्तविक मालिक होते हैं तथा कंपनी के लाभ हानि से जुड़े रहते है | साधारण शेयर होल्डर के अंशो की संख्या के अनुपात में ही इनका कंपनी में मालिकाना अधिकार होता है |

कंपनी की नीति बनाने वाले जितने भी वार्षिक सभाये (Annual general meeting ) होती हैं उनमें इन्हें बैठने और अपना मत देने का अधिकार होता है | यदि कंपनी अपना व्यवसाय पूर्ण रूप से समाप्त करती है तब कंपनी अपनी सारी देनदारी चुकता करने के बाद बची हुई पूंजी इन सभी साधारण शेयर होल्डर में उनकी शेयर की संख्या के अनुपात में बाट दी जाती है | जो शेयर, परेफरेंस शेयर (Preference share) नहीं होते हैं उन्हें इक्विटी शेयर (Equity share) या इक्विटी शेयर कैपिटल (Equity share capital) माना जाता है

इक्विटी शेयर के प्रकार Equity share ke prakar

इक्विटी शेयर (Equity share) को आम भाषण में केवल शेयर कहा जाता है | विभिन्न प्रकार के अंशो  की अलग-अलग विशेषताएं होती हैं इसलिए इनके सभी प्रकारों को समझना बहुत ही आवश्यक है ताकि निवेशक अपनी जरूरतों तथा विवेक के अनुसार उनका चयन कर सके | भारत में निवेशकों को दो प्रकार के शेयर का विकल्प उपलब्ध है |

मताधिकार इक्विटी शेयर क्या है – Voting right equity share kya hai

इक्विटी शेयर विद वोटिंग राइट्स वह शेयर (share) है जिनके धाराको को कंपनी के सभी सभाओ में भाग लेने, बैठने, बोलने, तथा सुनाने का अधिकार होता है | यह कंपनी के वास्तविक मालिक माने जाते हैं क्योंकि इनको कंपनी में सबसे अधिक अधिकार होते हैं |

अर्धमताधिकार इक्विटी शेयर क्या है – Differential right equity share क्या है

इक्विटी शेयर विद डिफरेंशियल राइट वे शेयर (share) है जिनके धारकों को मताधिकार के अलावा सभी सामान्य अधिकार प्राप्त होते हैं जो एक मताधिकार वाले शेयर धारक होते हैं | इस प्रकार के शेयर धारकों को कुछ विशेष परिस्थितियों में ही वोट डालने का अधिकार होता है या कभी भी वोट डालने का अधिकार नहीं होता है | इस प्रकार के शेयर धारकों को इक्विटी शेयर धारकों से अधिक लाभांश दिया जाता है | सर्वप्रथम टाटा कंपनी ने 2 सन 2008 में इस प्रकार के शेयर बाजार में लाए थे |

Preference share क्या है

बहुत बार जब शेयर क्या हैं ( Share kya hai ) आपके मन में आता है तो इक्विटी शेयर के बारे में ही सोचते है लेकिन किसी कम्पनी की सफ़लता में जितना इक्विटी शेयर ( Equity share ) का योगदान होता है उतना ही प्रेफेरेंस शेयर ( Preference share ) का भी होता है |

प्रेफेरेंस शेयर (Preference share) वह शेयर होते हैं जिनको कंपनी के लाभ में और कंपनी के समापन की स्थिति में पूंजी वापस लेने में सामान्य अंशधारियो की अपेक्षा अधिक वरीयता दी जाती है | प्रेफरेंस शेयरधारकों (Preference share holder) को एक सामान्य दर से लाभ लेने का अधिकार होता है |

कंपनी साधारण शेयर के विपरीत कंपनी के चुनिंदा प्रमोटरों और दोस्ताना निवेशकों को प्रेफरेंस शेयर जारी करती है | प्रेफरेंस शेयर की कीमत इक्विटी शेयर (Equity share) की कीमतों से अलग होती भी हो सकती है और यह अधिक भी हो सकती है | सामान्यतः प्रेफरेंस शेयरधारकों को साधारण सभा में भाग लेने का अधिकार नहीं होता है |

प्रेफरेंस शेयरहोल्डर (Preference share holder) को प्रति वर्ष, वर्ष के अंत में एक निश्चित दर से लाभांश मिलता है | प्रेफरेंस शेयरहोल्डर इक्विटी शेयरहोल्डर की अपेक्षा अधिक सुरक्षित होते हैं क्योंकि जब कंपनी बंद करने की स्थिति आती है तो पूंजी चुकाने के मामले में प्रेफरेंस शेयरहोल्डर (Preference share holder) को इक्विटी शेयरहोल्डर (Equity share holder) को से अधिक वरीयता दी जाती है | प्रेफरेंस शेयरहोल्डर्स को लाभ में से सबसे पहले हिस्सा मिलता है लेकिन उन्हें कंपनी का मालिक नहीं माना जाता है |

दोस्तों अभी तक तो आप इक्विटी शेयर क्या है Equity share kya hai और प्रेफरेंस शेयर क्या है (Preference shares kya hai) यह तो आप समझ ही गए होंगे | प्रेफरेंस शेयर को 5 भागो में बता जाता है | तो दोस्तों अब हम प्रेफरेंस शेयर के इन सभी पांचो प्रकार को विस्तार में समझेंगे |

क्युम्युलेटीव प्रेफरेंस शेयर क्या है – Cumulative preference share kya hai

Cumulative preference share kya hai अगर इसे आसन भाषा में समझे तो अगर किसी वर्ष में कंपनी को लाभ नहीं होता है जिसके कारण कंपनी किसी साल में Cumulative preference shareholders को लाभांश वितरित नहीं कर पाती हैं इस हालात में Cumulative preference share holders का यह अधिकार होता है कि वह पिछले साल के लाभांश अगले साल में एक निश्चित ब्याज दर के साथ ले | Cumulative preference shareholders को किसी भी हालात में लाभांश का वितरण करना कंपनी के लिए अनिवार्य है चाहे कंपनी को लाभ हो चाहे ना हो |

नॉन-क्युम्युलेटीव प्रेफरेंस शेयर क्या है – Non-cumulative preference share share क्या है

Non-cumulative preference share holder, cumulative preference share holders से अलग उन वर्षों में लाभ के लिए दावा नहीं कर सकते जिन वर्षों में कंपनी ने कोई लाभ नहीं कमाया है |जबकि cumulative preference share holders को यह अधिकार दिया जाता है कि अगर कंपनी किसी को किसी कारणवश लाभ नहीं कमा पाती है तो उस वर्ष का नाम क्युम्युलेटीव प्रेफरेंस शेयर होल्डर्स को अगले वर्ष दिया जाए |

रिडिमेबल प्रेफरेंस शेयर क्या है – Redeemable preference share share kya hai

रिडिमेबल प्रेफरेंस शेयर (Redeemable preference share) ऐसे शेयर होते हैं जिनको कंपनी एक निश्चित समय के बाद वापस खरीद सकती है | अतः इस प्रकार के शेयर जारी करते समय कंपनी और शेयर होल्डर्स के बीच में यह अनुबंध होता है कि कंपनी एक निश्चित समय के बाद शेयर को वापस खरीद लेगी |

कम्पनी अधिनियम की धारा 55 के अनुसार कोई भी ऐसी कंपनी जो कंपनी अधिनियम 2013 या उससे पहले के कंपनी अधिनियम के अंतर्गत रजिस्टर्ड की गई हो, ऐसी कोई भी कंपनी  एसा प्रेफरेंस शेयर जारी नहीं कर सकती हैं जिसे कम्पनी वापस नहीं खरीद सकती |

कनवर्टिबल  प्रेफरेंस शेयर शेयर क्या है – Convertible preference share क्या है

कनवर्टिबल  प्रेफरेंस शेयर होल्डर (Convertible preference share holder) को  यह अधिकार होता है कि वह किसी भी समय अपने प्रेफरेंस शेयर को इक्विटी शेयर (equity share ) में बदल सकते है | यहां ध्यान देने की बात यह है कि बदलने के समय  1 प्रेफरेंस शेयर के बदले कितने इक्विटी शेयर दिए जाएंगे यह कन्वर्जन रेट (Conversion rate) के ऊपर निर्भर करता है  | कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर खरीदने का लाभ यह है कि उसके धारक को  इक्विटी शेयर धारकों की अपेक्षा पहले और अधिक लाभ दिया जाता है |

नॉन-कनवर्टिबल  प्रेफरेंस शेयर शेयर क्या है – Non-Convertible preference share kya hai

कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर (Convertible preference share) के उलट नॉन कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर Non-Convertible preference share) ऐसे शेयर होते हैं जिनको भविष्य में कभी भी इक्विटी शेयर (equity share ) में बदला नहीं जा सकता | इस तरह के शेयर जिस रूप में खरीदे जाते हैं जीवन पर्यंत वह उसी रूप में रहते हैं | परंतु इस प्रकार के शेयरधारकों को सामान्य शेयरधारकों की अपेक्षा अधिक लाभांश भी दिया जाता है |

दोस्तों यह तो था कि Preference share kya hai और उनके सभी प्रकारों का विवरण | अब हम कुछ अन्य तरह के share के बारे में नानेंगे |

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स्वेट इक्विटी शेयर शेयर क्या है – Sweat equity share kya hai

स्वेट इक्विटी शेयर शेयर क्या है – Sweat equity share kya hai यह कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 54 में इसके बारे में बताया गया है | इसके अनुसार अगर कंपनी इन निम्न शर्तो को पूरा करती है तो कंपनी पहले से जारी किए गए अंशो के वर्ग के शेयर स्वेट इक्विटी शेयर के रूप में जारी कर सकती है |

  • स्वेट इक्विटी शेयर के निर्गमन के लिए कंपनी द्वारा एक विशेष प्रस्ताव पारित करके किया  जाये |
  • उस प्रस्ताव में जारी किए जाने वाले अंशो का मूल्य, उनका वर्ग, वे सभी कर्मचारी और निर्देशक जिनको यह अंश दिया जा रहा है उनका नाम दर्ज हो |
  • स्वेट इक्विटी शेयर जारी करने वाली कंपनी कम से कम 1 साल पुरानी होनी चाहिए |
  • अगर कंपनी किसी भी स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड है तो कंपनी को स्वेट इक्विटी शेयर जारी करने से पहले स्टॉक एक्सचेंज और सेबी के नियमों का भी पालन करना पड़ेगा |

Bonus share क्या है

बोनस शेयर शेयर क्या है यह कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 63 के अनुसार कंपनी चाहे तो अपने शेयरधारकों को पूर्ण चुकता शेयर बोनस शेयर (Bonus share) के रूप में दे सकती है | यह बोनस शेयर कंपनी के रेवेनुए रिज़र्व (revenue reserve) सिक्योरिटी प्रीमियम अकाउंट (security premium account)  या कैपिटल रिडेंप्शन रिजर्व अकाउंट (capital redemption reserve account)  में से ही दिया जाएगा | यहां ध्यान देने की बात यह है कि कंपनी अपने संपत्तियों को बेचकर जो रिजर्व बनाती है उसमें से बोनस शेयर (Bonus share) जारी नहीं कर सकती हैं | हालांकि कंपनी को बोनस शेयर जारी करने से पहले निम्न शर्तो का पालन करना अनिवार्य है |

  • एक कंपनी बोनस शेयर केवल तभी जारी कर सकती है जब बोनस शेयर (Bonus share) का निर्गमन  कंपनी के पार्षद अंतर्नियम में दिया गया हो |
  • कंपनी अपने जनरल मीटिंग में बोनस शेयर (Bonus share) जारी करने के लिए एक प्रस्ताव लाये और वो पारित हो जाये |
  • इसके अलवा कंपनी द्वारा लोन चुकता करने और लोन पर ब्याज चुकता करने में कोई डिफॉल्ट न किया गया हो |
  • कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों को वैधानिक देय जैसे प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी, बोनस देने में कभी कोई गड़बड़ी या डिफाल्टर न किया गया हो |
  • बोनस शेयर (Bonus share) जारी करने से पहले कंपनी के सभी निर्गमित शेयर पूर्ण रूप से चुकता होने चाहिए |
  • बोनस शेयर (Bonus share) कंपनी की वर्तमान शेयरधारकों को फ्री में दिया जाना चाहिए |

राइट शेयर क्या है Right share kya hai

अगर आपने किसी भी कंपनी में पहले से निवेश किया है तो आपको Right share क्या है के बारे में पता होना चाहिए | राइट शेयर ऐसे शेयर है जो कंपनी की वर्तमान शेयरधारकों और डायरेक्टर को जारी किया जाता है | ऐसे शेयर, वास्तविक शेयर जारी होने के बाद भविष्य में जारी किए जाते हैं | इस प्रकार के शेयर में वर्तमान शेयरधारकों को या अधिकार होता है कि वह कंपनी द्वारा जारी किए जाने वाले शेयर को पहले खरीद सकें |

यह अधिकार शेयरधारकों द्वारा खरीदे गए शहर के अनुपात में दिया जाता है | राइट शेयर से संबंधित नियम कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 81 में दिया गया है | इस संबंध में कंपनी के वर्तमान शेयरधारकों को कम से कम 15 दिन पहले लिखित सूचना कंपनी द्वारा दी जानी चाहिए | और अगर वर्तमान शेयर धारक 15 दिन के अंदर इस प्रकार के शेयरों को खरीदने का दावा नहीं करते हैं तो कंपनी को कंपनी इस प्रकार के शेयर नए शेयरधारकों को बेच सकती है |

दोस्तों उम्मीद है की शेयर क्या होता हैं – share kya hota hai, इक्विटी शेयर क्या है – Equity share kya hai, प्रेफेरेंस शेयर क्या है – Preference share kya hai तथा इनके सभी प्रकारों को आपने भली भांति समझ लिया होगा | अब हम प्रेफेरेंस शेयर और इक्विटी शेयर के लाभ के बारे में बात करेंगे |

प्रेफेरेंस शेयर के लाभ – Preference share ke labh

प्रेफेरेंस शेयर धारकों को एक निश्चित ब्याज दर से लाभ प्राप्त करने का अधिकार होता है तथा प्रेफेरेंस शेयरधारकों को या अधिकार है कि वह इक्विटी शेयर (Equity share) धारकों से पहले लाभ प्राप्त करें |और अगर किसी कारण वस कंपनी को किसी वर्ष में लाभ नहीं होता है तो इस प्रकार के  शेयर धारकों को यह अधिकार है कि वह इस वर्ष के लाभ भी आगामी वर्ष में ले सकते हैं |

कम्पनी के दिवालिया घोषित होने पर या कंपनी के समापन की स्थिति में प्रेफरेंस शेरहोल्डर्स को अपनी पूंजी वापस लेने का अधिकार होता इक्विटी शेयरधारकों से पहले होता है | इस स्थिति में इक्विटी शेयर होल्डर्स अपनी पूंजी वापस तभी पा सकेंगे जब प्रेफेरेंस शेयरधारकों की पूंजी पूर्ण रूप से चुकता हो जाए | अतः कंपनी के समापन या दिवालिया घोषित होने की स्थिति में प्रेफरेंस शेरहोल्डर्स, समता या इक्विटी शेरहोल्डर्स से अधिक सुरक्षित होते हैं |

कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर धारक एक निश्चित समय के बाद अपने प्रेफरेंस शेयर्स को समता या इक्विटी शेयर में परिवर्तित कर सकते हैं | ऐसा अधिकार केवल कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर धारकों को ही होता है | अगर कंपनी भविष्य में अच्छा करती है तो कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर होल्डर इस अधिकार का फायदा उठा कर समता अंशधारी बन सकते है क्योंकि समता अंशधारी को ही कंपनी में असीमित लाभ लेने का अधिकार होता है |

इक्विटी शेयर के लाभ – Preference share ke labh

कमाने की क्षमता

इक्विटी शेयर होल्डर (Equity shareholders) के पास लाभ कमाने की क्षमता और संभावनाएं अन्य प्रकार के अंशधारियों निवेशकों से अधिक होती है क्योंकि यह कहा जाता है कि व्यक्ति के लाभ कमाने की क्षमता उसके जोखिम लेने की क्षमता के अनुपात में ही होती है | क्योंकि हम जानते हैं कि कंपनी में निवेश के नजरिए से इक्विटी शेयर होल्डर की लाभ कमाने की संभावनाएं सबसे अधिक होती है | इक्विटी शेयर होल्डर की लाभांश की दर अनिश्चित होता है और वह कंपनी के होने वाले लाभ के असली मालिक होते हैं |

इक्विटी शेयर होल्डर (Equity shareholders) को दो तरह का लाभ कमाने का अवसर होता है | पहले अवसर में वह लाभांश प्राप्त करके लाभ कमा सकते हैं जबकि दूसरे अवसर में  समता अंश के मूल्य में होने वाले वृद्धि से भी लाभ कमा सकते हैं | जबकि अन्य प्रकार के शेयर के मूल्य में उतार-चढ़ाव ना के बराबर होता है जिससे लाभ कमाने की अवसर भी बहुत कम होता है |

सीमित दायित्व

इक्विटी शेयर (Equity share) की सबसे मुख्य विशेषता उनका सीमित दायित्व का होना है | इक्विटी शेयर होल्डर (Equity shareholders) के दायित्व सीमित होते हैं | इस प्रकार के इक्विटी शेयर होल्डरका दायित्व उनके द्वारा खरीदे गए शेयरों की पूर्ण चुकता मूल्य तक ही सिमित होता है | कंपनी के समापन की स्थिति में या कंपनी के दिवालिया घोषित होने की स्थिति में कंपनी अपने इक्विटी शेयर होल्डर से उनके द्वारा खरीदे गए अंशो के पूर्व चुकता मूल्य तक ही पैसे वसूली कर सकते हैं इससे अधिक नहीं |

समापन

दोस्तों इस पोस्ट में हमने share क्या है ? share क्या है और शेयर कितने प्रकार के होते हैं यह जाना तथा सभी प्रकार के शेयर के लाभ और हनी क्या है उनको भी समझा अगर आपको या पोस्ट पसंद आया तो कृपया इस पोस्ट के नीचे कमेंट करें और अपने दोस्त मित्रों में इस पोस्ट को शेयर करना ना भूले दोस्तों अगर आप किसी विशेष विषय पर पोस्ट चाहते हैं तो कृपया हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं हम आपके आभारी होंगे |

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